Atul Pateriya by Cartoonist Mansoor

Atul Pateriya by Cartoonist Mansoor

Tuesday, April 20, 2010

केंद्र सरकार और कांग्रेस आलाकमान बैकफुट पर

शशि थरूर बनाम ललित मोदी के रूप में शुरू हुए इस संपूर्ण घटनाक्रम में बतौर विदेश राज्य मंत्री थरूर को बलि का बकरा बना देना गले नहीं उतरता। यह प्रकरण सीधे तौर पर राजनीतिक नूराकुश्ती प्रतीत होता है। न तो केंद्र सरकार को और न ही कांग्रेस या भाजपा अथवा किसी अन्य राजनीतिक दल को पिछले तीन साल से आईपीएल के कारोबार से कोई सरोकार था।
क्या सरकार, वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग, तमाम जिम्मेदार संस्थाएं अब तक मोदी के ट्वीट का इंतजार कर रही थीं कि खुद आईपीएल जब तक यह न बताए कि फ्रैंचाइ निवेश अथवा अन्य वित्तीय मामलों में गड़बड़ घोटाला है तब तक एक्शन में नहीं आएंगे।
कई सवाल अब भी बरकरार हैं। क्या थरूर के ऊपर लगे आरोप तर्कपूर्ण कहे जा सकते थे? और यह भी कि क्या उन पर लगे आरोप साबित हुए? यदि नहीं तो किस आधार पर कांग्रेस आलाकमान और प्रधानमंत्री ने थरूर को विदेश राज्य मंत्री जसे पद से हटा दिया? कांग्रेस थिंक टैंक से इस तरह की जल्दबाजी की वाक़ई उम्मीद नहीं थी। उसे इस मामले (थरूर के) में भाजपा के साथ नूराकुश्ती में उलझने की आवश्यक्ता नहीं थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि थरूर ने बतौर केंद्रीय मंत्री अपने पद का दुरुपयोग किया। उसका आरोप था कि थरूर ने अपनी महिला मित्र को आईपीएल फ्रैंचाइजी में गैरवाजिब लाभ दिलाया। मंत्री पद से हटाकर कांग्रेस और सरकार ने थरूर को अपरोक्ष अपराधी घोषित कर दिया। जबकि थरूर लगातार कहते रहे कि पहले इन आरोपों की जांच कराई जाए। मंत्री पद से हटाए जाने के बाद भी उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री से यही मांग की।
राजनीतिक प्रपंचों और कूटनीति से परे यदि थरूर के पक्ष पर ग़ौर किया जाता तो स्पष्ट था कि उन पर लगे आरोपों से यह साबित नहीं हो सकता था कि उन्होंने कोच्चि फ्रैंचाइजी मामले में किसी भी रूप में अपने मंत्री पद का दुरुपयोग किया। उनकी महिला मित्र सुनंदा पुष्कर को कोच्चि फ्रैंचाइजी(रांदेवू) ने जिस भी रूप में इक्विटी दी, यह उस फ्रैंचाइाी का निजी मामला था। इससे यह साबित नहीं होता कि थरूर ने इसके लिए दबाव बनाया। और यह भी साबित नहीं हो सकता कि बतौर विदेश राज्य मंत्री वह किसी तरह का दबाव बनाने की स्थिति में थे। पद का दुरुपयोग तो उस स्थिति में होता जब वह इसका दुरपयोग करने की स्थिति में होते, जसे कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह थे। लेकिन थरूर के मामले में यह तथ्य अहम था कि बतौर विदेश राज्य मंत्री वह आईपीएल अथवा कोच्चि फ्रैंचाइजी पर किसी तरह का दबाव बनाने की स्थिति में नहीं थे। आईपीएल का विदेश मंत्रालय से सीधे तौर पर कोई गंभीर वास्ता भी नहीं होता है। तो फिर बिना किसी नतीजे पर पहुंचे प्रधानमंत्री/कांग्रेस आलाकमान ने थरूर को दोषी करार देकर क्या संदेश देने की कोशिश की? क्या इसे भाजपा से भयभीत होने के रूप में देखा जाए? अथवा, नैतिक जिम्मेदारी के रूप में उठाया गया कदम माना जाए? दोनों ही तथ्य यह स्थापित करते हैं कि थरूर अंदरूनी और बाहरी राजनीति का शिकार बन बैठे।
निष्कर्स यह कि आईपीएल की पिच पर कांग्रेस और सरकार दोनों बैकफुट पर जा खड़े हुए। थरूर का नाम आते ही सरकार ने तमाम जांच एजेंसियों को काम पर लगा दिया। बेहद चौंका देने वाला तथ्य कि आईबी और रॉ जसी गुप्तचर संस्थाएं भी जांच में लगा दी गईं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी थरूर पर लगे आरोपों की जांच देख रहे थे और नतीजा यह रहा कि थरूर की छुट्टी कर दी गई, बिना यह सामने लाए कि उन पर लगे आरोप साबित हुए अथवा नहीं।
एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि सरकार और उसके तमाम जिम्मेदार विभाग इस मामले (भाजपा के थरूर पर आरोप लगाने) के बाद आईपीएल की कार्यप्रणाली और उसके वित्तीय लेनदेन को जांचने-परखने के लिए जिस तरह हरकत में आए, पिछले तीन साल से क्या वह गहरी नींद में थे?
अब मोदी को हटाने का दबाव बन रहा है। ज़ाहिर है सरकार से बैर लेकर आईपीएल को नहीं चलाया जा सकता। मोदी को हटाकर हिसाब बराबर करने की कोशिश हो रही है। मोदी को हटाए जाने से पहले भी इस बात पर ग़ौर किया जाना चाहिए कि मोदी पर आरोप क्या हैं और क्या आरोप सिद्ध हुए हैं? यदि ऐसा नहीं होता तो स्पष्ट हो जाएगा कि थरूर और मोदी की बलि देकर आईपीएल के रहस्य पर पर्दा डालने की कोशिश सफल हुई।

5 comments:

  1. atul ji no dout aapne bahut sahi likha hai n haan jo aapne baat uthai hai kya tharoor ke khilaf saboot hai to sarkaar ko is baat jawaab jaroor dena chahiye ki kis binah par istifa liya gaya. kyunki vipaksh ke dabaav main aap itna hi hai to baaki chizo par bhi dhyan dijiye atul ji ye b kahoonga ki kahi na kahi supriya sule or farooq sahab ka b pasa isme laga hai ek baat or ki pawaar sahab ko itni tawajjo kyo di ja rahi hai sidhe tor par dekha jaye to vo ex president hai governing (ipl) ki member hai to unka role spasht nahi hai

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    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  4. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

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